Wednesday, August 20, 2014

मैं चाहता हूँ

1.

मैं चाहता हूँ 
ख्वाब निर्जीव न हों,
उठान हो निर्भीक। 
मैं चाहता हूँ 
लौट आये बचपन। 

२. 

मैं चाहता हूँ 
लम्बाई बढ़े दिन की
चटक चमक हो उजाले की। 
मैं चाहता हूँ 
अँधेरे का दमन। 


3.


मैं चाहता हूँ 
पी सकूँ धुंआ, गर्द  कालिख 
समा जाए मुझी में जहर। 
मैं चाहता हूँ 
साफ़ हवा बहे अब से। 

Sunday, August 10, 2014

न कह सका अपनी, न सुना तेरी

न कह सका अपनी, न सुना तेरी
ज़िन्दगी, हम रह गये अपरिचित ही।

साथ होने से ही, हैं हम दोनों
अजीब है नहीं, हमारा होना ही।

चन्द सांसें दी हैं तुमने मुझको
एक तुमको मिला मुझसे, मायना ही।

नहीं साम्य कहीं, मध्य हम दोनों
तुम घटते गए, मैं बढ़ा ही। 












Saturday, August 2, 2014

बीत रहा मै...

 १. 

व्यर्थ,
या अन्यथा
बीत रहा मै। 

२. 

भरा पूरा,
ठसक ठसक 
रीत रहा मैं। 

३.

चलती नहीं,
ख़त्म होती ज़िन्दगी
टीस रहा मैं।  








Tuesday, July 22, 2014

अशेष नहीं, समय भी....

१.

अशेष नहीं, समय भी।  
ख़त्म हो,
वक़्त भी।

२.

न  पहले कुछ। 
न  बाद कुछ
मुझ तक, सिमटा समय।

३.

घूम फिर वहीं लौटे। 
नहीं कुछ और 
ज़िन्दगी का मक़सद, ज़िन्दगी।  






Saturday, May 17, 2014

कोई शीर्षक नहीं

1.

रिंग में मास्टर, बाहर शेर 
नए तमाशे ऐसे ही,
नकली मास्टर नकली शेर .

2.

बहुत तेज़ हवा है
आँचल बेहतर होता,
घर का दिया न बुझे, खुद के सैलाब में.

3.

आप वाकिफ हैं, है हमें भी पता 
जश्न में जले हैं 
अपने ही आशियाने भी .




Thursday, May 15, 2014

सोलह मई से एक दिन पहले

१. 

बड़ी अदा से,
बदल गए खुद को। 
तस्वीर मगर बासी ही लगा रखी है। 

२. 

तुम हो, फिर बीबी बच्चे तुम्हारे 
हमारे दिल पर 
हक़ तुम्हारा, खुला या छिपा। 

३. 

दो दिन,
भरम बनाए रखना। 
रोजी रोटी में लग जाऊँगा, दो दिन बाद। 




Saturday, October 19, 2013

मैं चाहता हूँ

१. 

मैं चाहता हूँ,
लिखूँ एक ग़ज़ल, गुनगुना सके तू भी 
समझ आए कभी, कोई ज़ज्बात मेरे। 

२. 

मैं चाहता हूँ,
रचे तू जब तस्वीर, दिखूं मैं भी 
भले अनदेखी, इक दुआ पास हो तेरे। 

३. 

मैं चाहता हूँ,
लाल हो धरती औ स्याह आकाश जब 
झक सफ़ेद ही हो, चूनर तेरी।