Tuesday, July 22, 2014

अशेष नहीं, समय भी....

१.

अशेष नहीं, समय भी।  
ख़त्म हो,
वक़्त भी।

२.

न  पहले कुछ। 
न  बाद कुछ
मुझ तक, सिमटा समय।

३.

घूम फिर वहीं लौटे। 
नहीं कुछ और 
ज़िन्दगी का मक़सद, ज़िन्दगी।  






Saturday, May 17, 2014

कोई शीर्षक नहीं

1.

रिंग में मास्टर, बाहर शेर 
नए तमाशे ऐसे ही,
नकली मास्टर नकली शेर .

2.

बहुत तेज़ हवा है
आँचल बेहतर होता,
घर का दिया न बुझे, खुद के सैलाब में.

3.

आप वाकिफ हैं, है हमें भी पता 
जश्न में जले हैं 
अपने ही आशियाने भी .




Thursday, May 15, 2014

सोलह मई से एक दिन पहले

१. 

बड़ी अदा से,
बदल गए खुद को। 
तस्वीर मगर बासी ही लगा रखी है। 

२. 

तुम हो, फिर बीबी बच्चे तुम्हारे 
हमारे दिल पर 
हक़ तुम्हारा, खुला या छिपा। 

३. 

दो दिन,
भरम बनाए रखना। 
रोजी रोटी में लग जाऊँगा, दो दिन बाद। 




Saturday, October 19, 2013

मैं चाहता हूँ

१. 

मैं चाहता हूँ,
लिखूँ एक ग़ज़ल, गुनगुना सके तू भी 
समझ आए कभी, कोई ज़ज्बात मेरे। 

२. 

मैं चाहता हूँ,
रचे तू जब तस्वीर, दिखूं मैं भी 
भले अनदेखी, इक दुआ पास हो तेरे। 

३. 

मैं चाहता हूँ,
लाल हो धरती औ स्याह आकाश जब 
झक सफ़ेद ही हो, चूनर तेरी। 







 

Friday, October 18, 2013

तमाम रंग हैं उजले।

१. 

ज़रूरी नहीं,
मुझसे जुड़ना। 
मेरी सार्थकता, जीने की हिम्मत बची रहे तुझमे। 

२. 

तमाम रंग हैं उजले। 
अंधेरे की, हिस्सेदारी रहने दो मेरी।  

३. 

मुद्दतों बाद मिलेंगे, पहचान लेना 
सूरत मेरी,
बदलती रहती। रहता मैं वहीँ स्थिर। 

Friday, October 4, 2013

बेरंग, रंग स्थाई

१. 

एक ताल है,
उदासी की भी।
मौत भी  
एक धुन है। 

२. 

बिखर जाना,
एक कला है।
बेरंग,
रंग स्थाई। 

३. 

पहचान गहरी,
एक छलावा। 
एक विराम है,
ख़त्म हो जाना।  
 


Wednesday, October 2, 2013

१.

सच सह नही पाता साथ 
एक सच
झूठा कर देता है, बाकि सब। 

२. 

मौत, तेरे आगे सब झूठे। 

३.

नहीं, कई बार कोइ मतलब। 
सच भी बेमतलब, झूठ बेमतलब।