१. न चकित / निराश नहीं । प्रेम, सत्कार / परे , किसी छुअन से भी । अभाव, भाव का / हमारी नियत इतनी ॥ २. हमें तलाश नहीं / न आकांक्षा । हमारा दौर / असमय से समयातीत । शून्य, समाज / हमारी उपलब्धि ॥
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Wednesday, June 19, 2013
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Monday, June 17, 2013
मैं, सो नहीं पाता॥
१.
मेरी खिड़की से
बहुत दूर
नज़र आता है
चाँद ।
अपनी हद से
परे
मैं,
जा नहीं पाता ॥
२.
रात और बढ़ जाती है
जगा
देख , मुझे ।
बंद आँखों भी,
मैं,
सो नहीं पाता॥
३.
बेतरह
लगती है, भूख
देख रसोई ।
भटक गया हूँ ,
इतना, घर
मैं,
पहुँच नहीं पाता ॥
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Friday, June 14, 2013
ख़याल कई
ख़याल कई,
नहीं बांटे ॥
बताया तो था, तुमको
भोर की ओस, छूने की कशिश,
चाहत मोर पंखों की,
ख्वाब, नीले धुनों पर थिरकन ॥
नहीं बताया कभी
डर, झांकते कुँए में गिरने का
भय, चलती ट्रेन से कूद जाने का
दुह्स्वप्न आत्महत्या का
तुमने भी तो छिपाया, मुझसे
जो न, बांटो
घट जाता है ॥
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Thursday, June 13, 2013
शुरू के चन्द चक्कर
शुरू के चन्द चक्कर
लोग कहते हैं, हैं
मुश्किल ।
हर सुबह ही , बस
दुश्वारी
दिन कट जाता है ।
कुछेक चक्कर बाद
पाँव खुदबखुद खींचते खुद को
दिन ढो लेता है.
सुबह की दौड़ औ ज़िन्दगी
धकेल रहे खुद को
चंद चक्कर बाद
रुक जाता हूँ
रोज़
मशीनी दौड़ से आजिज़ आ,
बेशर्म ज़िन्दगी
हर सुबह
वही तमाशा करती ॥
रोज़ ही दौड़ने जाता हूँ
मैं ॥
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Tuesday, June 11, 2013
अंत हुआ
इसतरह
अनंत का ॥
आशा ने दामन छोड़ा
ख़त्म हुई
निराशा ॥
नहीं पता
पर
अभाव है, शून्य
या पूर्णता मेरी ॥.
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ख़त्म हो जाता है / सचमुच,सबकुछ / रह जाता है, / फिर भी मैं ॥ परे, सन्नाटे के / नहीं आवाज़ / कोई / न ख्वाब,न क़त्ल उनका / खडा मिलता है / आतप्त मैं ॥
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Monday, June 10, 2013
बुनता रहा मैं
गीत ।
मेरे अनजान
ही,
चखते रहे
मुझको
गीत मेरे ।
चीरा मुझको
मुझी से, पेट भरा
रक्तस्नान कर
शुद्ध हुए
गीते मेरे ।
उन्ही शब्दों ने जिया मुझको
जिनकी चौखट
आसरा थी मेरी ।
प्रेम
निर्लज्ज
घृणा
लज्जा ।
तार तार
खुली, बुनाई
मेरी ॥
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